मेरा सच्चा अनुभव: बिना गुरु दीक्षा के माँ काली साधना की शुरुआत Part 1

Jai Maa Kali

मुझे आज भी वह समय याद है जब मेरी जिज्ञासा धीरे-धीरे आत्मविश्वास से बढ़कर अहंकार में बदल गई थी। कुंडलिनी योग का अभ्यास करने के बाद मुझे कुछ सूक्ष्म अनुभूतियाँ होने लगीं, जिससे मुझे लगा कि मैं अब और गहरी तथा शक्तिशाली साधना के लिए तैयार हूँ।

यही वह समय था जब मैंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने मेरी सोच पूरी तरह बदल दी।

बिना गुरु दीक्षा लिए, बिना किसी नियम, विधि या सुरक्षा के ज्ञान के, मैंने माँ काली साधना शुरू कर दी। मैंने केवल कुछ लोगों से सुनी-सुनाई बातें और अधूरी जानकारी के आधार पर यह कदम उठाया। एक साधना गुरु ने मुझे पहले ही चेतावनी दी थी, “सावधान रहो, यह मार्ग आसान नहीं है।” लेकिन मैंने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया।

अहंकार और जिज्ञासा के कारण मैंने यह साधना चुपचाप, बिना किसी को बताए शुरू कर दी।

शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन अंदर ही अंदर एक अजीब सी तीव्रता बढ़ने लगी—जिसे मैं उस समय समझ नहीं पाया।

आज मैं यह अनुभव इसलिए साझा कर रहा हूँ ताकि लोग सावधान रहें। आध्यात्मिक मार्ग, विशेषकर शक्तिशाली साधनाएँ, कोई प्रयोग नहीं हैं। सही मार्गदर्शन, अनुशासन और दीक्षा बहुत जरूरी होती है।

अगर आप चाहें, तो मैं इस यात्रा के अगले चरण में क्या हुआ, वह भी साझा कर सकता हूँ।

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